Tuesday, January 1, 2008

क्रिश्चियन सेवा का उद्देश्य

क्रिश्चियन सेवा भारत के कोने कोने में पहुंच कर दस्तक दे रही है। हमारे देश के सबसे अच्छे स्कूल और अस्पताल, क्रिश्चियन सेवा के तहत शुरू किये गए थे . ये शिक्षण संस्थान केवल क्रिश्चियन बच्चो और लोगो के लिए ही नही परंतु सब के लिए अर्थात सम्पूरण देशवासी के लिए बनाए गए थे। थोडे से लोगो के द्वारा बहुत ही बड़ी देश सेवा शुरु की गयी है।

इस सेवा का उदेश्य था, और है ... परमेश्वर के नाम को महिमा देना और उसकी सृष्टि की सेवा करना। ऐसा हो भी रहा है किन्तु कुछ लोग सेवा को समझ नही पाते। क्योंकि उनकी बुद्धि में सेवा का अर्थ और उद्देश्य नही घुसता। इसका कारण उनकी छोटी बुद्धि नही परन्तु सेवा का कांसेप्ट न होना और dusta के विचार होना है।

दर असल क्रिश्चियन लोगो ने सेवा का मूल मंत्र अपने गुरु और प्रभु येशु से पाया। प्रभु येशु ने कहा था मैं सेवा कराने नही परन्तु करने आया हूँ। और जैसे मैंने तुम से प्यार किया है तुम भी दूसरो से ऐसा ही करो।

बाइबल ने सिखाया दीन, दुखी लोगो की सेवा, विधवा और अनाथों की सेवा करना, यही धरम का मूल है। यही तो भारत के मसीही लोग कर रहे हैं। अपने प्रभु के कदमो पर चलकर एक नमूना पेश कर रहे हैं।

अब बात करें धर्म परिवर्तन की, धर्म परिवर्तन पैसे के द्वारा हो रह है। गरीब, दुखी, जनजाति और दलित लोग धर्म परिवर्तन कर रहे है। क्रिश्चियन लोग उनका लाभ उठा रहे हैं। यह सब गलत आरोप है। कोई भी व्यक्ति किसी को जबरदस्ती नही बदल सकता। पवित्र बाइबल ऐसा कहीं नही बताती । प्रभु येशु ने कही भी ऐसा आदेश नही दिया।

क्या मसीही सेवा का दुरूपयोग हो रह है, नही, यदि ऐसा कही हुआ है और हो रह है तो यह सर्वथा गलत है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति प्रभु येशु की शिक्षाओ से प्रभावित हो कर, उनके पीछे चलता है तो उसे गलत नही कहा जाना चाहिऐ। मैं खुद इसका उदाहरण हूँ। मैं प्रभु येशु के पवित्र जीवन, और उनकी शिक्षाओं से पूरी तरह अवगत होकर ही उनका अनुयायी बना हूँ। मेरे साथ किसी ने कोई जबरदस्ती नही की, न कोई प्रलोभन दिया।

मुझे प्रभु येशु की शिक्षा अच्छी लगी। येशु हमें या मुझे मारने नही परन्तु मरने के लिए आये। येशु मुझे दोषी ठहराने नही परन्तु प्रेम करने के लिए आये । उन्होने कहा यदि मैं उनका अनुयायी बनू तो मुक्ति पाउँगा। और परमेश्वर की संतान बनुगां।

मसीही सेवा का अर्थ मैं भी समझ सका केवल बाइबल पढ़ने के बाद। यदि किसी को कोई संका हो तो खुद पढे और दूसरो को जो लोग सेवा करते हैं उनपर मिथ्या आरोप न गढे।

जीवन थोडे दिन का है, हर कोई जो झूठा करता है और दूसरो को ऐसा करने से उकसाता है, वह जीवित प्रभु से फल पाए बिना नही रहेगा। चाहे वह येशु प्रभु का अनुयायी हो या फिर कोई दूसरा। मित्रो सच्चाई के पीछे चले और झूठ को त्याग दे।

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