दोस्तों से बढकर भी एक दोस्त है दुनिया में.
नाम है उसका येशु,
दोस्तों की दोस्ती होती है कुछ दिन की,
होती है कुछ स्वार्थ से भरी,
इसलिए तो दोस्तों पर भरोसा करना भी,
हो गया है कितना कठिन.
घूम रहे हैं दोस्तों के रूप में भी
हैं कितने ही बुरे इन्सान.
चाहते है जो, केवल अपना ही भला,
दोस्ती की होती नहीं ऐसो को परवाह.
दोस्ती का मतलब उनके लिए,
उनका भला भर होता है,
साथी जाये भाड़ में, चिंता होती है,
केवल अपनी मात्र!
नहीं येशु दोस्त ऐसा दोस्तों,
उसने तो अपनी दोस्ती को प्यार,
की हद तक दिखाया है,
क्रूस है उस दोस्ती का निशान.
बाहें खोलकर उसने कहा,
इतना प्यार मैं तुमसे करता हूँ.
तुम्हारी दोस्ती की कदर भी,
मैं करता हूँ.
Tuesday, January 22, 2008
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